Monday, October 19, 2009

कौन कहता है ? यहां पत्थर भी पूजे जाते है,

· संजीव खुदशाह

कौन कहता है ? कि हम विश्व शांति के प्रतिक है,

यदि ऐसा है, तो हममे इतनी अशांति क्यू है ?

कौन कहता है ? कि यहां लोक तंत्र है,

यदि ऐसा है, तो लोक शाहो का आचरण भ्रष्ट क्यूं है ?

कौन कहता है ? यहां संविधान का आदर होता है,

यदि ऐसा है, तो अपराधी कुर्सी पर क्यूं हैं ?

कौन कहता है ? कि यहां सर्वधर्म सम भाव है ,

यदि ऐसा है, तो धर्मान्तरण पर आपत्ति क्यूं है ?

कौन कहता है ? कि यहां भी लोग शिक्षित है ,

यदि ऐसा है, तो जिसकी लाठी भैस उसी की क्यूं है ?

कौन कहता है ? कि देश जहां को रास्ता दिखायेगा,

यदि ऐसा है, तो ये अपने रास्ते से भटका क्यू है ?

कौन कहता है ? कि यहां ज्ञानी पुरूष रहते है ,

यदि ऐसा है, तो मूखों का शासन क्यू है ?

कौन कहता है ? यह महात्माओं का देश है ,

यदि ऐसा है, तो आपस में जातिय घृणा क्यूं है ?

तहसील बटा हम खुश हुए, जिला बटा हम खुश हुए,

प्रदेश बटा हम खुश हुए, देश बटने में हमें दुख क्यूं है ?

कौन कहता है ? कि मंदिर बनाने का सपना देती है देवी मां,

यदि ऐसा है, तो किसी बेबस की आबरू लुटने की खबर लेती क्यू नही है ?

कौन कहता है ? कि हस्ती मिटती नही हमारी ,

यदि ऐसा है, तो ये हस्ती इतनी बेआबरू क्यूं है ?

कौन कहता है ? कि शौर्य से भरा इतिहास है हमारा ,

यदि ऐसा है, तो बार बार लुटवाने का इतिहास क्यूं है ?

हम जानते है कि क्या, है औकात हमारी,

फिर हम इतना खुदी पे फिदा क्यूं है ?

कौन कहता है ? यहां पत्थर भी पूजे जाते है,

यदि ऐसा है, तो यहां, इन्सान अछूत क्यूं है

Name of book :- "Safai Kamgar Samuday "

Scavenger in India (A research)

ISBN-81-8361-022-6

Price & Total Page of Book:- 150 Rs. & 147 page

Name of publisher:- Radhakrishna Prakashan Pvt. Ltd.

C/o M.D.

Rajkamal Prakashan Pvt. Ltd

1-B Netaji Subhash Marg, Dariyagang

New Delhi (India) 110002

1 comment:

  1. sach to yaha hain ki main hi galat hun, kyoki main apane darpaN se bate kiye ja raha hun ...


    ..........buddha ne kaha hain

    "sabhi praaNiyon ke prati danD tyag kar, usamen se kisi eka ko bhi n sataaye. putra ki kamana n karo, bhir sathi ki kaen bat? gaenDe ki bhanti akela vicharaN kare ..."

    bhavatu sabb mangalan

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